कुलदीप मौर्या के लिए
साल हा साल
लम्हा दर लम्हा
यूँ ही मुस्कुराते हँसते हंसाते ,
चहकते महकते और कभी लजाते
तुम नित नयी ऊँचाइयों को पार करते जाओ
और जब उनसे गुजरो
तो दुआ मेरी ये है उस वक्त के लिए
कि उस वक्त तुम्हारी आँखों में ,नींद थकन और नीरस विचार नही
बल्कि कुछ नए ख़्वाब कुछ नए अरमान ही रहें
नयी खुशियाँ नए होंसले तेरे मेहमान ही रहें
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