कोड्स को सुलझाते ,जिंदगी को उलझाते,घूमते छकाते ही रहना |
कुछ लिखते,कुछ पढ़ते
यूँ ही चले मंजिलों पे बढते ;
तुम सदा चलते ही रहना
खवाबों में पलते ही रहना ;
कभी दर्द भी मिलेंगें ,मिलने देना
अक्सर राह में फूल खिलेंगे ,खिलने देना
तुम सदा चलते ही रहना
कि अभी,
वक्त-ए-वक्फ़ा-ए-आराम नही आया,
दम भर ठहरने का मक़ाम नही आया;
अभी बहुत मुसाफत बची है काटने को
जीस्त में ज़माना-ए-तवाम नही आया ......
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